Wednesday, February 13, 2008

क़ज़ा

क़ज़ा अपने आप में बुरी नही
सिर्फ़ वहाँ तक का रास्ता डर से भरा है
फिर तो सिर्फ़ खामोशी है
और कुछ भी नही...........................

-- काली हवा

रात 12 बजे चंडाखाल की सैर

चंद रोज़ क़बल मोहतरम मोनू साहिब की श्री बडोलगांव आमद हुई। जनाब 3 किलो मुर्गा लेकर हाज़िर हुए और फर्माइश की कि मुर्गा भड्डू मे ज़ेर-ए-आसमान प...